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कलाम के प्रति

डूब गया वह सूर्य ,
हमे था जिसपर नाज,
हैं कृतज्ञ हम भारतवासी ,
उनके आज,
फर्श मिला था उन्हें ,
बनाया उसको अर्श,
पाकर यह हीरा ,
चमका था भारतवर्ष,
रहे नही अब वही यहां,
हैं उनकी याद,
भर आएंगी आंखे ,
कर उनको याद।

*~~~~सूरज*

16/8/2018

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5 Comments

बहुत ही सुन्दर व शानदार रचना रची आपने भइया 👌👌

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बहुत उम्दा लिखा है आपने👌👌🙏

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सूरज शुक्ला

28-Jul-2021 10:44 PM

ji bahut shukriya

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Ravi Goyal

28-Jul-2021 10:12 PM

Bahut khoob 👌👌

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सूरज शुक्ला

28-Jul-2021 10:44 PM

dhnywad

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